एक विश्वास

एक विश्वास, दुनिया के बदलने का।

133 Posts

68 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 5061 postid : 1332461

कविता

Posted On: 30 May, 2017 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

ये जिंदगी है
मस्त है बेफिक्र है,
हर रंज ओ गम से बेगानी है;
हँसती है खिलखिलाती है,
सब की उम्मीद बन मुस्कराती है।
ये जिंदगी है,
इसकी यही कहानी है।
दुनिया, इसकी दीवानी है।
यही जिंदगी की परिभाषा है,
कि ये सब की आशा है।
ये जिंदगी है
समय का खेल है,
इसमें ठेलमठेल है।
यह हँसाती है कभी
तो कभी रुलाती है,
ये सपनों को सजाती है, तोड़ जाती है
और उम्मीदों को
रोज नए मोड़ पर छोड़ जाती है।
बड़ी बेरहम है ये जिंदगी
इसमें सवालों के घेरे है,
कुछ दुख भी घनेरे है;
जिंदगी महज प्रत्याशा है
वरना इसमें निराशा है।
ये जिंदगी है
ये एक खिलौना है।
कुदरत का बिछौना है।
ये कभी छलती है
कहीं सपनों में पलती है;
मगर लोग
अपनी धुन में खोए हैं,
कभी हँसे कभी रोए हैं।
अभी सीने से लगाए थे जिसे
उसकी ही यादों से,
अब अलग खोए हैं।
उधर अर्थी सजी है
इधर छीना झपटी मची है
जिंदगी तेरा कोई ठिकाना है?
या बस यूँ ही आना जाना है?
वाह रे जिंदगी,
तुझे कुदरत ने खूब तराशा है।
तू कैसे समझ में आए?
तू तो अजब तमाशा है।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran